उत्तराखंड: कच्ची उम्र के विवाह और गर्भधारण पर हाइकोर्ट चिंतित, बाल कल्याण विभाग को सख्त आदेश

ऐसे मामलों में कई बार युवती के परिवार दावे के अनुसार उनकी बेटी नाबालिग पाई जाती है। ऐसी स्थिति में युवक को पॉक्सो अधिनियम के तहत कठोर सजा मिलती है और विवाहित किशोरी अकेली रह जाती है।

उत्तराखंड में किशोर अवस्था में होने वाले विवाहों को रोकने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है, लेकिन फिर भी राज्य में कम उम्र में विवाह करने वालों की संख्या में कमी नहीं आई है। उत्तराखंड में बड़ी संख्या में युवक-युवतियां किशोर अवस्था में विवाह कर रहे हैं और सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट का सहारा ले रहे हैं। हाईकोर्ट नैनीताल ने किशोर अवस्था में हो रहे विवाहों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।High court concerned about underage marriage and pregnancyहाईकोर्ट नैनीताल में आज बृहस्पतिवार क...
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