उत्तराखंड: अनपढ़ पहाड़ी महिलाओं के रचे गीत गा रहे प्रोफेशनल, विरासत बची रहेगी.. पर संस्कृति?

ज्यादातर लोकगीत अनपढ़ पहाड़ी महिलाओं द्वारा रचे जाते थे, जब वे खेतों में काम करती थीं, पानी भरती थीं या लकड़ी इकट्ठा करती थीं। ये गीत उनके सुख-दुख, संघर्ष और सपनों को अभिव्यक्त करते थे..

पहाड़ी शादियाँ, जो कभी हल्दी हाथ, मंगल गीत जैसी विशिष्ट परंपराओं से भरी होती थीं, अब बदल गई हैं। मांगलिक कार्यों में पहले गाँव की महिलाएँ, बिलकुल सही समय पर, तुरंत सांस्कृतिक गीत गा देती थीं, अब उनकी जगह पेशेवर गायक, डीजे या मोबाइल रिकॉर्डिंग ने ले ली है। Survival of Dialects, Folk, Culture and Oral Traditions of Uttarakhandऐतिहासिक रूप से, लोकगीत अनपढ़ पहाड़ी महिलाओं द्वारा रचे जाते थे, जब वे खेतों में काम करती थीं, पानी भरती थीं या लकड़ी इकट्ठा करती थीं। ये गीत उनके सुख-दुख, सं...
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