रामपुर तिराहा कांड: 31वीं बरसी के बाद भी लापता हैं आंदोलनकारी, गवाह लड़ रहे कानूनी लड़ाई

"02 अक्टूबर 1994" को उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर उत्तराखंड के सात आंदोलनकारियों की गोलीमारकर हत्या की गई और 16 महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया था। उत्तराखण्ड के लिए 02 अक्टूबर हमेशा काला दिवस ही कहलाएगा।

आज 2 अक्टूबर 2025 को रामपुर तिराहा हत्याकांड को 31 साल पूरे हो गए हैं। 2 अक्तूबर 1994 को मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर राज्य आंदोलनकारियों पर हुई गोलीबारी, महिलाओं के साथ की गई बर्बरता को आज भी उत्तराखंड आंदोलन के सबसे दर्दनाक अध्यायों में गिना जाता है। पुलिस की बर्बरता में कई आंदोलनकारियों ने जान गंवाई, कई घायल हुए और कई आज भी लापता हैं। रामपुर तिराहा कांड आज भी उत्तराखंड की जनता के लिए झकझोरने वाली याद बनकर खड़ा है।2 October 1994 black day in history of Uttarakhandउत्तरप्रदेश ...
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