देवभूमि का मान-सम्मान ऐसे ही बनाए रखना, भ्रष्टतंत्र का दुश्मन बना ये ‘सिंघम’
उसकी राह में सिस्टम ऐसे-ऐसे व्यवधान पैदा करता है कि ईमानदारी कहीं छिपकर पनाह ढूंढने लगती है। लेकिन ये भी सत्य है कि यदि अधिकारी भ्रष्टतंत्र का हिस्सा न बनने की ठान ले तो वो राजनेताओं की चूलें हिलाने का माद्दा रखता है, पर इसके लिए साहस की दरकार है। जो ऐसा साहस दिखाने का गुर्दा रखेगा, वही इस भष्टतंत्र की जड़े खोखली कर पाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ी एक ईमानदार माहौल में सांस ले सके। सत्ता और शक्ति जब हाथ में हो तो नियम-कानूनों को अपने स्वार्थ के हिसाब से तोड़ना मरोड़ना मुश्किल नहीं। ऐसे में नेता, मंत्री अप...
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