Video: देवभूमि के फौजी बृजेश बिष्ट को सलाम, आजादी के 7 दशकों में जो नहीं हुआ, वो कर दिया
जनता विकास की राह तकती जाती है, उम्मीदें हुक्मरानों से जुड़ी रहती हैं। लेकिन जब उन्हें वादों के अलावा कुछ नहीं मिलता तो ऐसे हालात एक नए मौके को जन्म देते हैं। कुछ ऐसे मौके, जो इतिहास बन जाते हैं, सदा के लिए लोगों के दिलों में जगह बना लेते हैं। खास तौर पर जब पहाड़ के एक फौजी की बात करें, तो उनके हौसले को कोई नहीं डिगा पाया। हम उन्हें दशरथ मांझी नहीं कहेंगे, उन्हें पहाड़ का माधो सिंह भंडारी इंसान कहा जाए तो ज्यादा बेहतर होगा। उत्तराखंड के चम्पावत जिले के एक गांव है खूनामलक। आजादी के बाद से इस गांव...
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