अच्छी खबर: अब गढ़वाली में पढ़िए श्रीमद् भगवद् गीता, पहाड़ के महान लेखक को नमन
इस वक्त उत्तराखंड के लिए अपनी बोली और भाषा को बचाना एक चुनौती है। इस चुनौती से कैसे पार पाया जाए ? कुछ तो ऐसा करना होगा कि हम आगे आने वाली पीढ़ियों को भी कुछ संदेश दे सकें। ऐसे ही कुछ लोग हैं, जिन्होंने अपनी बोली और भाषा को बचाने के लिए जीवन भर मेहनत की है। वो लोग चले गए लेकिन अपने पीछे कुछ ऐसी यादें छोड़ गए, जो उत्तराखंड की आने वाली पीढ़ियों के लिए एक तोहफा है। ऐसी ही एक महान आत्मा थे स्वर्गीय जगदीश प्रसाद ...
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