उत्तराखंड में क्यों मनाई जाती है ईगास? ये है वीर माधो सिंह भंडारी की शौर्यगाथा..आप भी जानिए
ये मान्यता 17 वीं शताब्दी में गढ़वाल के प्रसिद्ध भड़ (योद्धा) मलेथा गांव के वीर माधो सिंह भंडारी (Story of Egas Parv Madho Singh Bhandari) से जुड़ी है।
ईगास..एक वीर (Story of Egas Parv Madho Singh Bhandari) के घर आने के उत्सव का समय। उत्तराखंड में ईगास धूमधाम से मनाई जा रही है। दिवाली के 11 दिन बाद पहाड़ में एक ओर दिवाली मनाई जाती है, जिसे इगास कहा जाता है। इस दिन सुबह मीठे पकवान बनाए जाते हैं और शाम को भैलो जलाकर देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। पूजा-अर्चना के बाद ढोल-दमाऊं की थाप पर भैलो (भीमल या चीड़ की लकड़ी का गट्ठर) जलाकर घुमाया जाता है और नृत्य किया जाता है। एक मान्यता है कि भगवान राम के लकां विजय कर ...Click Here to Read Full Article