Uttarakhand High Court: सहकर्मियों के सामने अपमान को कोर्ट ने माना मानसिक क्रूरता, दो वकीलों का तलाक बरकरार
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दो वकीलों के तलाक के मामले में फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि लगातार अपमान और पेशेवर व निजी मामलों में दबाव का संचयी प्रभाव मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आया।
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दो वकीलों के वैवाहिक विवाद में देहरादून फैमिली कोर्ट के 5 अप्रैल 2024 के तलाक के फैसले को बरकरार रखा है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की डिवीजन बेंच ने पत्नी की पहली अपील खारिज करते हुए माना कि पति मानसिक क्रूरता का आधार साबित करने में सफल रहा। कोर्ट ने पति को नाबालिग बेटी की देखभाल और शिक्षा के लिए 70 लाख रुपये तथा पत्नी को 40 लाख रुपये स्थायी गुजारा-भत्ता देने का भी निर्देश दिया।Uttarakhand High Court Upholds Divorce in Mental Cr...
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